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11 साल के बचà¥à¤šà¥‡ का बीपी कितना होना चाहिà¤?
पà¥à¤°à¥à¤·à¥‹à¤‚ के लिठरकà¥à¤¤à¤šà¤¾à¤ª की ऊपरी सीमा 90/60 से 145/90 तक हो सकती है। नवजात शिशà¥à¤“ं का बà¥à¤²à¤¡ पà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤° 90/60, छह महीने से दो साल तक के बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ का रकà¥à¤¤à¤šà¤¾à¤ª 100/70, 18 साल के बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ का रकà¥à¤¤à¤šà¤¾à¤ª 120/80, 40 साल के वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ का बà¥à¤²à¤¡ पà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤° 135/80 और वृदà¥à¤§ लोगों का रकà¥à¤¤à¤šà¤¾à¤ª 145/90 तक हो सकता है।
आज के समय में हाई बà¥à¤²à¤¡ पà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤° (High Blood Pressure) यानी उचà¥à¤š रकà¥à¤¤à¤šà¤¾à¤ª à¤à¤• आम समसà¥à¤¯à¤¾ बन गया है। इसके कारण कम उमà¥à¤° के लोग à¤à¥€ कई बीमारियों से गà¥à¤°à¤¸à¤¿à¤¤ हो जाती हैं। बà¥à¤²à¤¡ पà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤° यानी नसों में खून दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ डाला गया पà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤°à¥¤ इसको दो संखà¥à¤¯à¤¾à¤“ं में मापा जाता है। सà¥à¤²à¥ˆà¤¶ से ऊपर वाले अंकों को सिसà¥à¤Ÿà¥‰à¤²à¤¿à¤• बलà¥à¤¡ पà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤° यानी हाई बà¥à¤²à¤¡ पà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤° कहा जाता है। वहीं, निचले हिसà¥à¤¸à¥‡ को डायसà¥à¤Ÿà¥‰à¤²à¤¿à¤• यानी लो बà¥à¤²à¤¡ पà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤° कहा जाता है।
हमारे शरीर का सामानà¥â€à¤¯ बà¥à¤²à¤¡ पà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤° 120/80 mmHg माना जाता है। इससे जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ पà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤° हाई बà¥à¤²à¤¡ पà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤° होता है। जैसे, 140-159/90-99 mmHg। अमेरिकन हारà¥à¤Ÿ à¤à¤¸à¥‹à¤¸à¤¿à¤à¤¶à¤¨ हाई बà¥à¤²à¤¡ पà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤° को 130/80 या उससे अधिक मानता है। बà¥à¤²à¤¡ पà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤° की बीमारी इतनी खतरनाक बन चà¥à¤•ी है कि इसे साइलेंट किलर कहा जाने लगा है। कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि यह बीमारी बिना कोई लकà¥à¤·à¤£ दिखाà¤, धीरे-धीरे आपके अंदर गंà¤à¥€à¤° बीमारियों को बढ़ावा देने लगता है।
बà¥à¤²à¤¡ पà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤° किडनी और हृदय से लेकर पूरे शरीर को बà¥à¤°à¥€ तरह पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ कर सकता है। यह जानना à¤à¥€ बेहद जरूरी है कि उमà¥à¤° के हिसाब से किस वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ का कितना बà¥à¤²à¤¡ पà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤° होना चाहिà¤à¥¤
15 से लेकर 18 साल पà¥à¤°à¥à¤·à¥‹ में 117 -77 mmhg महिला में 120 -79 mmhg होता है।
21से 25साल तक पà¥à¤°à¥à¤·à¥‹ में 121 -79 mmhg महिला में 116 -71 mmhg
26 से 30 साल तक पà¥à¤°à¥à¤·à¥‹ में 120 -77 mmhg महिला में 114 -72 mmhg,
31 साल से 35 तक पà¥à¤°à¥à¤·à¥‹ में 115-77 mmhg महिलाओं में 110 -73 mmhg
36 साल से 40 तक पà¥à¤°à¥à¤·à¥‹ में 120-76 mmhg महिलाओं में 113-75 mmhg
41 साल से 45 तक पà¥à¤°à¥à¤·à¥‹ में 116-80mmhg महिलाओं में127-74 mmhg
46 साल से 50 तक पà¥à¤°à¥à¤·à¥‹ में 120-81 mmhg महिलाओं 1₹124-79 mmhg
51 साल से 55 तक पà¥à¤°à¥à¤·à¥‹ में 126-80 mmhg महिलाओं में 123 -75 mmhg
56 साल से 60 साल तक पà¥à¤°à¥à¤·à¥‹ में 130 -80 mmhg महिलाओं में 133 -79 mmhg
60 से अधिक के लोगो का पà¥à¤°à¥à¤·à¥‹ 144 -77mmhg महिलाओं में 130 -77 mmhg
जीवन में थोड़ा-सा संयम,अनà¥à¤¶à¤¾à¤¸à¤¨ और सकरातà¥à¤®à¤•ता से बà¥à¤² डपà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤° पर आसानी से काबू किया जा सकता हैं। इसके लिठआप ये उपाय अपना सकते हैं।
-हेलà¥à¤¦à¥€ डायट लें और सही लाइफसà¥à¤Ÿà¤¾à¤‡à¤² फॉलो करें। à¤à¥‹à¤œà¤¨ जितना पà¥à¤°à¤¾à¤•ृतिक वनसà¥à¤ªà¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ से यà¥à¤•à¥à¤¤ हो उतना ही अचà¥à¤›à¤¾ है।
-हाई बà¥à¤²à¤¡ पà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤° के मरीजों को डाइट में खटà¥à¤Ÿà¥‡ फलों को शामिल करना चाहिà¤à¥¤ खटà¥à¤Ÿà¥‡ फलों में उपसà¥à¤¥à¤¿à¤¤ विटामिन-सी से बà¥à¤²à¤¡ पà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤° नियंतà¥à¤°à¤£ में रहता हैं। कदà¥à¤¦à¥‚ के बीज,फलीदार सबà¥à¤œà¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ ,ताजे फल को रोजाना अपने à¤à¥‹à¤œà¤¨ में करें शामिल। बà¥à¤²à¤¡ पà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤° के मरीजों के लिठगाजर और पालक à¤à¥€ का सेवन काफी फायदेमंद होता है।
-बà¥à¤²à¤¡ पà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤° को नियंतà¥à¤°à¤£ में रखने के लिठरोजाना पिसà¥à¤¤à¤¾ का सेवन करना चाहिà¤à¥¤ पिसà¥à¤¤à¤¾ में फाइबर, पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨, विटामिन सी, जिंक, कॉपर, पोटैशियम, आयरन और कैलà¥à¤¶à¤¿à¤¯à¤® की मातà¥à¤°à¤¾ काफी अधिक होती है। इसके अलावा रोजाना कम से कम 10 गिलास पानी पिà¤à¤‚।
-डायट में नमक का बैलेंस बनाकर रखें। हाई बीपी की सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ में जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ नमक खाने से बचें। हाई बà¥à¤²à¤¡ पà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤° के 40-50 पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¶à¤¤ रोगियों में नमक घटाने से रकà¥à¤¤à¤¦à¤¾à¤¬ पर अनà¥à¤•ूल पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ पड़ता है।
-टेंशन, थकान और तनाव से दूर रहें। जब à¤à¤• वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ चिंता मे रहता हैं तो नरà¥à¤µà¤¸ सिसà¥à¤Ÿà¤® की गतिविधियां बà¥à¤²à¤¡ पà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤° बढ़ा देती हैं और धमनी रोग को बढ़ावा देती हैं।
-वà¥à¤¯à¤¾à¤¯à¤¾à¤® करें,अचà¥à¤›à¤¾ खाà¤à¤‚ और रिलेकà¥à¤¸ रहने की कोशिश करें। इससे हाई बà¥à¤²à¤¡ पà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤° का खतरा कम रहेगा।
-धूमà¥à¤°à¤ªà¤¾à¤¨ छोड़ने से बà¥à¤²à¤¡à¤ªà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤° नहीं घटता, लेकिन बà¥à¤²à¤¡ पà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤° की वजह से विà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ अंगों पर पड़ने वाले असर जैसे à¤à¤‚जाइना, दिल का दौरा और मसà¥à¤¤à¤¿à¤·à¥à¤• आघात में कमी लाने में मदद मिलती है
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